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चोर पकड़ा गया: जासूस मोंटी बंदर का कमाल - जंगल की कहानी

जंगल के राजा का हार चोरी हो गया! क्या जासूस मोंटी बंदर असली चोर को पकड़ पाएगा? पढ़िए 'चोर पकड़ा गया' की यह रोमांचक जासूसी कहानी। Jungle Stories | Moral Stories

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चोर पकड़ा गया:- भारत के दक्षिण में 'सुंदरवन' नाम का एक बहुत ही खूबसूरत और घना जंगल था। यहाँ के राजा 'शेर सिंह' (शेर) थे, जो बहुत ही न्यायप्रिय और शक्तिशाली थे। जंगल में सब कुछ शांति से चल रहा था, लेकिन एक सुबह जंगल में कोहराम मच गया।

शेर सिंह का सबसे कीमती 'नवरत्न हार' (Nine-Gem Necklace), जो उन्हें उनके पूर्वजों से मिला था, उनकी गुफा से गायब हो गया था! यह हार न केवल कीमती था, बल्कि जंगल की शान भी था। शेर सिंह ने दहाड़ते हुए पूरे जंगल की सभा बुलाई। सभी जानवर डर के मारे कांप रहे थे।

शेर सिंह ने गरजते हुए कहा, "मेरे सोने के वक्त मेरा हार मेरे सिरहाने रखा था। सुबह उठा तो वह गायब था। जिसने भी यह दुस्साहस किया है, अगर वह खुद सामने आ जाए तो ठीक, वरना हमारा शाही जासूस (Detective) उसे ढूंढ निकालेगा और कड़ी सजा देगा!"

जासूस मोंटी की एंट्री

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सुंदरवन का सबसे होशियार जानवर था 'मोंटी बंदर'। मोंटी कोई साधारण बंदर नहीं था। वह हमेशा एक छोटी सी टोपी पहनता था और उसके पास इंसानो द्वारा फेंका गया एक मैग्नीफाइंग ग्लास (Magnifying Glass) भी था। उसे जंगल का 'शरलॉक होम्स' कहा जाता था।

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शेर सिंह ने मोंटी को बुलाया और कहा, "मोंटी, यह तुम्हारी परीक्षा की घड़ी है। तुम्हें सूर्यास्त से पहले चोर को पकड़ना होगा।" मोंटी ने सिर झुकाकर कहा, "महाराज, आप निश्चिंत रहें। आज ही चोर पकड़ा गया समझिए!"

मोंटी ने तुरंत अपनी जांच शुरू कर दी। उसने सबसे पहले घटनास्थल (Crime Scene) यानी शेर सिंह की गुफा का मुआयना किया। मोंटी ने अपने मैग्नीफाइंग ग्लास से जमीन को गौर से देखा। उसे वहाँ तीन अहम सुराग मिले:

  1. पैरों के निशान: गुफा के बाहर गीली मिट्टी पर कुछ अजीब पंजों के निशान थे, जो न तो शेर के थे और न ही किसी बड़े जानवर के।

  2. नीला पंख: गुफा के प्रवेश द्वार पर एक छोटा सा चमकीला नीला पंख अटका हुआ था।

  3. मीठी खुशबू: गुफा के अंदर से पके हुए बेर (Berries) की हल्की-हल्की खुशबू आ रही थी।

मोंटी का शक और जांच

मोंटी समझ गया कि चोर कोई ऐसा जानवर है जो पंजों पर चलता है, लेकिन पंख भी रखता है? यह थोड़ा अजीब था। उसने अपनी जंगल की कहानी (Jungle Story) वाली बुद्धि लगाई।

उसने सोचा, "नीला पंख तो सिर्फ 'नीलू तोते' या 'मोर' का हो सकता है। लेकिन पंजों के निशान किसी चौपाए (चार पैरों वाले) जानवर के हैं। इसका मतलब चोर ने किसी पक्षी का पंख जानबूझकर गिराया है ताकि हम गुमराह हो जाएं।"

मोंटी ने जंगल के जानवरों से पूछताछ शुरू की। हाथी दादा ने बताया, "मैंने रात को 'रंगा सियार' को गुफा के पास मंडराते हुए देखा था।" लेकिन रंगा सियार बहुत चालाक था। उसने तुरंत सफाई दी, "अरे मोंटी भाई! मैं तो बस पहरा दे रहा था। मैंने तो खुद 'कालिया कौवे' को गुफा के अंदर जाते देखा था।"

मोंटी ने सबकी बातें सुनीं, लेकिन उसे किसी पर भरोसा नहीं हुआ। उसे वह 'बेर की खुशबू' याद थी। जंगल में सबसे मीठे बेर 'बेरी वाले नाले' के पास उगते थे। और उस नाले के पास सिर्फ एक ही जानवर रहता था - 'लल्लन लोमड़ी'।

जाल बिछाने की तैयारी

मोंटी को यकीन हो गया कि चोर लल्लन लोमड़ी ही है, लेकिन उसके पास पक्का सबूत नहीं था। लल्लन बहुत शातिर थी। उसे पकड़ने के लिए रंगे हाथों पकड़ना ज़रूरी था। मोंटी ने एक योजना बनाई। उसने पूरे जंगल में ढिंढोरा पिटवा दिया: "सुनो! सुनो! सुनो! जासूस मोंटी को पता चला है कि चोर ने हार को 'पुराने बरगद के पेड़' के नीचे छुपाया है। आज रात मोंटी वहां खुदाई करेगा और हार निकालेगा!"

यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। मोंटी जानता था कि असली चोर यह सुनकर घबरा जाएगा और हार को वहां से हटाने जरूर आएगा। यह साहस और बुद्धिमानी का खेल था।

रात का सन्नाटा और चोर की आहट

रात हुई। पूरा जंगल सो गया, लेकिन मोंटी और शेर सिंह के सिपाही (भेड़िए) पुराने बरगद के पेड़ के पास झाड़ियों में छिप गए। मोंटी ने जानबूझकर पेड़ के नीचे थोड़ी सी मिट्टी खोदकर छोड़ दी थी।

आधी रात को सन्नाटे में सूखी पत्तियों के चरमराने की आवाज़ आई। सर-सर-सर... एक परछाई दबे पांव पेड़ के पास आई। उसने इधर-उधर देखा और जल्दी-जल्दी पेड़ के तने के पास (जहाँ असल में कोई हार नहीं था) खोदना शुरू किया। उसे डर था कि कहीं मोंटी सच में हार न ढूंढ ले, इसलिए वह उसे वहां से हटाकर दूसरी जगह ले जाना चाहता था।

लेकिन जैसे ही उसने मिट्टी हटाई, वहां कुछ नहीं मिला। वह बड़बड़ाया, "अरे! हार यहाँ नहीं है? इसका मतलब मैंने हार अपनी गुफा में ही सुरक्षित रखा है, मोंटी बस झूठ बोल रहा था!"

और चोर पकड़ा गया!

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जैसे ही उस जानवर ने यह बात बोली, मोंटी ने टॉर्च (जुगनूओं की लालटेन) जला दी। रोशनी सीधे उस जानवर के चेहरे पर पड़ी। वह कोई और नहीं, बल्कि लल्लन लोमड़ी थी!

"पकड़ी गई!" मोंटी चिल्लाया। लल्लन लोमड़ी घबराकर भागने लगी, लेकिन शेर सिंह के सिपाहियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। मोंटी ने हँसते हुए कहा, "लल्लन मौसी! मैंने तो झूठ बोला था कि हार यहाँ है। तुमने खुद ही आकर बता दिया कि हार तुम्हारे पास है।"

लल्लन लोमड़ी के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी होशियारी धरी की धरी रह गई। सिपाहियों ने लल्लन की गुफा की तलाशी ली। वहां बेर के ढेर के नीचे वह चमचमाता हुआ 'नवरत्न हार' मिल गया। साथ ही, वहां नीले पंख भी मिले, जो उसने नीलू तोते को फंसाने के लिए जमा किए थे।

राजा का न्याय

अगली सुबह दरबार लगा। लल्लन लोमड़ी को जंजीरों में जकड़कर पेश किया गया। हार वापस पाकर शेर सिंह बहुत खुश थे। शेर सिंह ने कहा, "मोंटी! तुम्हारी बुद्धिमानी से आज जंगल का चोर पकड़ा गया। तुम सच में हमारे नवरत्न हो।"

लल्लन लोमड़ी रोने लगी और माफी मांगने लगी। शेर सिंह ने उसे कड़ी सजा दी - उसे एक साल तक जंगल की सफाई करनी होगी और सभी बुजुर्ग जानवरों की सेवा करनी होगी।

पूरे जंगल ने मोंटी की जय-जयकार की। मोंटी ने साबित कर दिया कि शारीरिक ताकत से ज्यादा बड़ी मानसिक ताकत होती है। हिंदी कहानियां में मोंटी की यह जासूसी हमेशा याद रखी गई।

बच्चों, अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो, वह कोई न कोई सुराग जरूर छोड़ता है और अंत में कानून के हाथ उस तक पहुँच ही जाते हैं।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. बुरे काम का बुरा नतीजा: चोरी और झूठ का अंत हमेशा बुरा होता है, जैसे लल्लन लोमड़ी पकड़ी गई।

  2. बुद्धि का प्रयोग: मोंटी ने ताकत से नहीं, बल्कि अपनी अकलमंदी और योजना से चोर को पकड़ा।

  3. झूठ के पाँव नहीं होते: अपराधी अपने ही जाल में फंस जाता है।

Tags: Jungle Detective Story in Hindi | Kids Mystery Stories | Hindi Kahaniya | Lotpot Kids | Panchatantra Tales

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